किया तो था!

अंतस ने भावों का हौले - हौले श्रृंगार किया तो था।

सब मुझे याद है, आँखों ने सपनों से प्यार किया तो था।।


वो सजी कल्पनाओं की गठरी- सी, बैठी थी आँगन में,

तब मौन ने उसके, भीगा-भीगा- सा मनुहार किया तो था।।


थे चले जा रहे साथ छोड़, गाँवों को उसके अंश सभी,

डबडबाए आँसुओं ने गिरने से  इन्कार किया तो था।


तब उसने यह संसार जिया था, देश प्रेम को ऊपर रख,

उसकी आँखों ने अपने सुख- दुख का व्यापार किया तो था।


जब सज कर लौटा था शहीद, चौखट से बंदनवार गिरा,

तब बच्चे फफक पड़े, पत्नी ने भी चीत्कार किया तो था।।


रश्मि लहर,

लखनऊ

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